nadi ke par nadi
Wednesday, February 15, 2012
दुःख और सुख तो जिंदगी के अलग-अलग दो पहलू हैं।
यह सच है कि हममें से कोई भी दुःख को पसंद नहीं करता।मगर हमारी पसंद और नापसंद से हमारी जिंदगी थोड़े ही चलती है!
ज़िंदगी है जीने का नाम
हम सब की ज़िंदगी है तो आखिर चंद घड़ियों की ही।
मेरे दोस्तो, इसलिए जितना हो सके उतना जी लो।
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